Est. 1980Reg. No. 99 of 1980 · Societies Registration Act, 1860Supporting Higher Education in Bihar & Jharkhand
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Portrait of Late Dr. T. R. V. P. N. Singh
Babu Kunwar Singh Education Fund

Late Dr. T. R. V. P. N. Singh

Revered Patron & Physician

डॉ. ठाकुर राम रण विजय प्रताप नारायण सिंह, जिन्हें परिवार में विजय बाबू और मोहन जी के नाम से पुकारा जाता था, एक समर्पित चिकित्सक, शिक्षक और मानवतावादी थे। उनका पूरा जीवन चिकित्सा सेवा, मानवता, परिवार और समाज के प्रति निष्ठा का उदाहरण रहा।

Location
Patna, Bihar
Association
Founding Patron (1985)

About & Biography

डॉ. ठाकुर राम रण विजय प्रताप नारायण सिंह का जन्म 25 जुलाई 1939 को गोपालगंज जिले के देवापुर गाँव में हुआ। उनके पिता श्री राधा रमण सिंह भारतीय पुलिस सेवा में थे और माता श्रीमती अनारवती देवी एक साधारण गृहिणी थीं। वे नौ भाई-बहनों में सबसे बड़े थे और बचपन से ही परिवार की जिम्मेदारियाँ उनके साथ जुड़ी रहीं।

वे बचपन से ही मेधावी और परिश्रमी थे। वर्ष 1955 में उन्होंने एम.एल.ए. अकादमी, दरभंगा से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और इसके बाद आई.एस.सी. की पढ़ाई के लिए सेंट कोलंबस कॉलेज, हजारीबाग गए। उन्होंने एम.बी.बी.एस. की प्रवेश परीक्षा में पूरे राज्य में छठा स्थान प्राप्त किया था और पटना मेडिकल कॉलेज में उनका प्रवेश लगभग निश्चित था, लेकिन उसी वर्ष आई.एस.सी. के केमिस्ट्री प्रैक्टिकल में वे अनुत्तीर्ण घोषित कर दिए गए। उन्होंने हार नहीं मानी। अगले वर्ष उन्होंने पुनः आई.एस.सी. की परीक्षा उत्तीर्ण की, दोबारा प्रवेश परीक्षा पास की और अंततः पटना मेडिकल कॉलेज पहुँचे। उन्होंने 1963 बैच में एम.बी.बी.एस. की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद एम.डी. (जनरल मेडिसिन) तथा एम.सी.सी.पी. (यू.एस.ए.) की उपाधि प्राप्त की।

पटना मेडिकल कॉलेज में उनका सबसे बड़ा योगदान डी.टी.सी.डी. (Diploma in Tuberculosis and Chest Diseases) पाठ्यक्रम की शुरुआत कराने में रहा। वे इस पाठ्यक्रम को प्रारम्भ कराने वालों में शामिल थे, इसके शिक्षक भी रहे और विद्यार्थी के रूप में इसकी पहली डिग्री प्राप्त करने वालों में भी उनका नाम रहा। उनके अथक प्रयासों से यह पाठ्यक्रम प्रारम्भ हुआ और बाद में राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कर सका। टी.बी. जैसी गंभीर बीमारी के क्षेत्र में उनके शोध और सेवाओं के लिए वर्ष 2016 में एम्स, पटना ने उन्हें विशिष्ट सम्मान से सम्मानित किया। भारतीय मेडिकल एसोसिएशन द्वारा उन्हें आजीवन उत्कृष्ट योगदान के लिए डॉ. ए. के. एन. सिन्हा स्मृति राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। बिहार के स्वास्थ्य क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दैनिक जागरण द्वारा उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ एक्सीलेंस से भी सम्मानित किया गया।

उनकी सबसे बड़ी पहचान केवल एक डॉक्टर के रूप में नहीं, बल्कि एक संवेदनशील और मानवतावादी व्यक्ति के रूप में थी। वर्ष 1993 में जब उनके पुत्र कलकत्ता से वापस आए, तब उनकी निजी प्रैक्टिस अपने चरम पर थी और वे प्रतिदिन लगभग सौ मरीज देखते थे। जब उनसे अपनी आय बढ़ाने के लिए जाँच और एक्स-रे की सुविधाएँ अपने क्लिनिक में शुरू करने का सुझाव दिया गया, तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनकी मेहनत से कई घरों का चूल्हा जलता है और यदि वे अपनी आय बढ़ाने पर ध्यान देंगे तो मरीजों की सेवा के लिए उनका समय कम हो जाएगा। उनके लिए डॉक्टरी का धर्म पैसा कमाना नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करना था।

दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों की सुविधा का वे विशेष ध्यान रखते थे। वे सुबह जल्दी मरीजों को देखने बैठ जाते थे ताकि उनकी जाँच और रिपोर्ट में अनावश्यक देरी न हो और उन्हें पटना में अतिरिक्त दिन न रुकना पड़े। मरीजों के प्रति उनकी यह संवेदनशीलता उनके चिकित्सकीय जीवन की विशेष पहचान थी।

वर्ष 2016 में वे अचानक अत्यंत गंभीर रूप से बीमार पड़े और एयर एम्बुलेंस से मुंबई के लीलावती अस्पताल ले जाए गए। लंबे समय तक उपचार और अस्पताल में रहने के बाद वे घर लौटे। लगभग एक वर्ष मुंबई में रहने के पश्चात जब वे पटना वापस आए, तो उनकी सबसे पहली चिंता अपने मरीजों की थी। उन्होंने पुनः अपना क्लिनिक शुरू किया और कुछ ही दिनों में उनके क्लिनिक के बाहर फिर से मरीजों की भीड़ लगने लगी।

उनकी दयालुता केवल मरीजों तक सीमित नहीं थी। उनके कम्पाउंडर श्याम और बनवारी के निधन के बाद वे उनके परिवारों को हर महीने उनकी आधी तनख्वाह के बराबर आर्थिक सहायता भेजते रहे। वर्ष 2025 तक यह सहायता जारी रही। उनके अन्य सहयोगियों गोपाल, शिवकुमार और बबलू के बच्चों की पढ़ाई, शादी और घर बनाने में भी उन्होंने हर संभव सहायता की। जरूरतमंद लोगों की मदद करना और उसका उल्लेख तक न करना उनके स्वभाव का हिस्सा था। उनके हजाम को भी उन्होंने लगभग दस वर्ष पहले नई दुकान खोलने के लिए पचास हजार रुपये दिए थे और कभी वापस नहीं माँगे।

जब वे मात्र 39 वर्ष के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया और नौ भाई-बहनों की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उसी समय उन्हें सऊदी अरब से अच्छे वेतन वाली नौकरी का प्रस्ताव मिला, लेकिन उन्होंने अपने परिवार को चुना। उन्होंने अपने सपनों से पहले अपने लोगों को रखा। उनके त्याग और परिश्रम का परिणाम रहा कि उनके सभी भाई-बहन शिक्षित, आत्मनिर्भर और अपने-अपने जीवन में सफल हुए।

उनका जीवन संघर्ष, कर्मठता, त्याग और करुणा से भरा हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में एक पुत्र, पिता, पति, भाई, मित्र, शिक्षक और चिकित्सक—हर भूमिका को पूरी निष्ठा से निभाया। उन्होंने न जाने कितनी जिंदगियों को छुआ, सँवारा, संभाला और आगे बढ़ाया।

19 नवंबर 2025 को ग्रेटर नोएडा में अपने पूरे परिवार के बीच उन्होंने अपनी अंतिम साँस ली। आज उनका विशाल परिवार उनके दिए हुए संस्कारों और मूल्यों की विरासत को आगे बढ़ा रहा है। वे धन-संपत्ति से कहीं बड़ी विरासत छोड़ गए—मानवीय मूल्यों पर चलने, अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने और मानवता की सेवा करने की विरासत। उनकी स्मृतियाँ, उनके आदर्श और उनके जीवन से मिली प्रेरणा आज भी उनके परिवार तथा उनसे जुड़े लोगों के जीवन में जीवित हैं।

Key Contributions & Initiatives

पटना मेडिकल कॉलेज में डी.टी.सी.डी. (Diploma in Tuberculosis and Chest Diseases) पाठ्यक्रम की शुरुआत कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
टी.बी. और छाती संबंधी रोगों के क्षेत्र में चिकित्सा सेवा, शोध और शिक्षण में योगदान दिया।
गरीब और दूर-दराज से आने वाले मरीजों के लिए समर्पित एवं समयबद्ध चिकित्सा सेवा प्रदान की।
अपने दिवंगत कर्मचारियों श्याम और बनवारी के परिवारों को लंबे समय तक नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की।
सहयोगियों के बच्चों की शिक्षा, विवाह और घर बनाने में आर्थिक एवं व्यक्तिगत सहायता की।
पिता के निधन के बाद अपने आठ छोटे भाई-बहनों की जिम्मेदारी उठाकर उनके शिक्षित और आत्मनिर्भर बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
भारतीय मेडिकल एसोसिएशन, एम्स पटना और अन्य संस्थाओं से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा में योगदान के लिए सम्मान प्राप्त किया।
Guiding Philosophy & Vision
“Higher education in Bihar must soar to international heights on the wings of merit and philanthropy.”
— Late Dr. T. R. V. P. N. Singh

Education & Background

MBBS, Patna Medical College; MD (General Medicine); MCCP (USA)

Society Governance

Designation:Revered Patron & Physician
Appointment:1985
Status: Active Member

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Authentic record and credentials registered with Babu Kunwar Singh Education Fund Management Society.

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